बिहार की राजनीति में जब ‘हाई-प्रोफाइल’ सांसदों की बात आती है, तो सारण (छपरा) के सांसद राजीव प्रताप रूडी का नाम सबसे ऊपर आता है। एक कमर्शियल पायलट, प्रोफेसर, और पूर्व केंद्रीय मंत्री—रूडी की शख्सियत बहुआयामी है। लेकिन एक आम मतदाता के लिए सबसे ज़रूरी यह है कि क्या उनके सांसद की यह ‘हाई-फ्लाइंग’ छवि सारण की गलियों और गाँवों में विकास बनकर उतरी है?
आइए, केंद्र सरकार की MPLADS (सांसद निधि) वेबसाइट और संसदीय रिकॉर्ड के आइने में देखते हैं रूडी के काम का लेखा-जोखा।

संसद में उपस्थिति: अनुशासन की मिसाल राजीव प्रताप रूडी
किसी भी क्षेत्र का विकास इस बात पर निर्भर करता है कि उसका प्रतिनिधि दिल्ली में कितनी मज़बूती से आवाज़ उठाता है। इस मामले में रूडी का कोई सानी नहीं है। 17वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 98% रही, जबकि 18वीं लोकसभा (2024-25) के शुरुआती सत्रों में वे 99% उपस्थिति के साथ सबसे सक्रिय सांसदों में गिने गए।
उन्होंने सिर्फ हाजिरी ही नहीं लगाई, बल्कि सवाल पूछने के मामले में भी रिकॉर्ड बनाया। 17वीं लोकसभा में उन्होंने 261 सवाल पूछे, जो बिहार के औसत (156) से कहीं ज़्यादा हैं। उनके सवालों में अक्सर बिहार के पिछड़ेपन, राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (NH-19) के अधूरे काम, और सारण में जल संकट जैसे गंभीर मुद्दे शामिल रहे हैं।
MPLADS फंड: कहाँ खर्च हुआ पैसा?
सांसद निधि यानी MPLADS वह फंड है जिसका सीधा इस्तेमाल स्थानीय विकास जैसे सड़क, नाली, और स्कूल के कमरों के लिए होता है। 16वीं लोकसभा के दौरान, सारण के लिए कुल 25 करोड़ रुपये की पात्रता थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, रूडी ने विकास कार्यों की सिफारिश तो भरपूर की, लेकिन बिहार की प्रशासनिक सुस्ती की वजह से फंड के उपयोग में ‘बैकलॉग’ भी दिखा।
17वीं लोकसभा में कोरोना महामारी के कारण दो साल तक यह फंड निलंबित रहा, लेकिन रूडी ने निरंतर मांग उठाई कि इस फंड की सीमा को 5 करोड़ से बढ़ाकर 15 करोड़ किया जाए, ताकि महंगाई के दौर में बड़े काम हो सकें।
- प्रमुख क्षेत्र: रूडी ने अपने फंड का बड़ा हिस्सा ग्रामीण कनेक्टिविटी (सड़कों और छोटे पुलों) और शिक्षा पर केंद्रित रखा है।
- डिजिटल पारदर्शिता: अब eSAKSHI पोर्टल के ज़रिए सारण के लोग भी अपने सांसद के काम को रियल-टाइम ट्रैक कर सकते हैं, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हुई है।
एंबुलेंस विवाद: एक कसक जो रह गई
विकास की चर्चा तब तक अधूरी है जब तक विवादों की बात न हो। मई 2021 में, कोरोना की दूसरी लहर के दौरान रूडी की सांसद निधि से खरीदी गई 30 एंबुलेंस के ‘बिना इस्तेमाल’ खड़े रहने पर बड़ा विवाद हुआ था। रूडी का तर्क था कि ड्राइवरों की कमी की वजह से गाड़ियाँ नहीं चल सकीं, लेकिन जनता के मन में यह सवाल आज भी है कि क्या इन संसाधनों का बेहतर प्रबंधन नहीं हो सकता था?
विज़न: सारण को ‘मॉडल डिस्ट्रिक्ट’ बनाने की चाह
रूडी अक्सर सारण को एक ‘इंडस्ट्रियल हब’ के रूप में देखते हैं। संसद में उनके सवाल—जैसे बिहार में ‘फ्लोटिंग जेटी’ का निर्माण, औद्योगिक कॉरिडोर की प्रगति, और कौशल विकास केंद्रों का अपग्रेडेशन—उनके इसी विज़न की ओर इशारा करते हैं। वे सिर्फ पारंपरिक राजनीति नहीं करते, बल्कि बिहार के युवाओं को आधुनिक तकनीक और उद्योगों से जोड़ना चाहते हैं।
क्या कहता है राजीव प्रताप रूडी का रिपोर्ट कार्ड?
यदि रूडी के काम को अंकों में तौला जाए, तो ‘संसदीय सक्रियता’ और ‘क्षेत्रीय विज़न’ में वे अव्वल आते हैं। हालांकि, सांसद निधि के क्रियान्वयन में प्रशासनिक बाधाओं को दूर करना और एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित करना उनकी अगली बड़ी चुनौती है।
सारण की मिट्टी के इस ‘पायलट’ ने विकास की उड़ान तो भर ली है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसे एक ‘स्मूथ लैंडिंग’ की ज़रूरत है ताकि हर गरीब तक विकास का लाभ पहुँच सके।


















