18वीं लोकसभा में देश की सबसे कम उम्र की सांसद बनकर इतिहास रचने वाली शांभवी चौधरी इन दिनों चर्चा के केंद्र में हैं। बिहार की समस्तीपुर सीट से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के टिकट पर जीत दर्ज करने वाली शांभवी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “अपनी बेटी” कहकर संबोधित किया था। लेकिन, हाल ही में उनकी सांसद निधि (MPLADS) के खर्च को लेकर उठे विवादों ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। आइए जानते हैं कि आखिर क्या है शांभवी चौधरी की सांसद निधि का सच और समस्तीपुर के विकास को लेकर उनका असली रोडमैप।

सांसद निधि (MPLADS) और ‘शून्य खर्च’ का विवाद
जनवरी 2026 की शुरुआत में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और आधिकारिक डेटा के आधार पर यह दावा किया गया कि बिहार के छह सांसदों ने अपनी सांसद निधि से एक भी रुपया खर्च नहीं किया है। इस सूची में शांभवी चौधरी का नाम प्रमुखता से आया। विपक्ष ने इसे विकास के प्रति उदासीनता बताया, लेकिन शांभवी चौधरी ने इन आरोपों का बड़ी बेबाकी से जवाब दिया।
शांभवी ने स्पष्ट किया कि फंड खर्च करना उनका निजी अधिकार है और वे विपक्ष के दबाव में आकर जल्दबाजी में फैसले नहीं लेंगी। उन्होंने तर्क दिया कि विकास योजनाओं का चयन एनडीए के कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता की सलाह पर किया जाएगा। शांभवी के अनुसार, उन्होंने अपनी योजनाओं का खाका (Roadmap) तैयार कर लिया है और वह छोटे-छोटे कार्यों के बजाय बड़े और असरदार प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करना चाहती हैं। अक्सर सांसद निधि का पैसा प्रशासनिक प्रक्रियाओं और तकनीकी मंजूरियों के कारण देरी से खर्च होता है, जिसे ‘जीरो खर्च’ के रूप में पेश किया जा रहा है।
शिक्षा के लिए बड़ा संकल्प: ‘पढ़ेगा समस्तीपुर तो बढ़ेगा समस्तीपुर’
विवादों से इतर, शांभवी चौधरी ने एक ऐसी मिसाल पेश की है जो भारतीय राजनीति में कम ही देखने को मिलती है। उन्होंने घोषणा की है कि वह अपने पूरे 5 साल का संसदीय वेतन (Salary) समस्तीपुर की लड़कियों की शिक्षा पर खर्च करेंगी। इसके लिए उन्होंने ‘पढ़ेगा समस्तीपुर तो बढ़ेगा समस्तीपुर’ अभियान की शुरुआत की है।
इस पहल का उद्देश्य उन लड़कियों को वित्तीय सहायता और छात्रवृत्ति प्रदान करना है, जिन्हें गरीबी के कारण अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। शांभवी का मानना है कि केवल सड़क और नाली बनाना ही विकास नहीं है, बल्कि युवाओं और महिलाओं को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना असली प्रगति है।
समस्तीपुर के विकास की प्राथमिकताएं
समस्तीपुर ऐतिहासिक रूप से एक कृषि प्रधान और औद्योगिक संभावनाओं वाला क्षेत्र रहा है। शांभवी चौधरी ने अपने घोषणापत्र में कुछ प्रमुख लक्ष्यों को रेखांकित किया है:
1. बंद मिलों का पुनरुद्धार: समस्तीपुर की प्रसिद्ध चीनी मिल और मुसेपुर की रामेश्वर जूट मिल को फिर से सक्रिय करना उनकी पहली प्राथमिकता है। इससे हजारों स्थानीय परिवारों को रोजगार मिलेगा और पलायन रुकेगा।
2. रेलवे और कनेक्टिविटी: हाल ही में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ उन्होंने कर्पूरी ग्राम स्टेशन पर 17 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इसमें यात्री प्रतीक्षालय, नए रेल अंडर ब्रिज (RUB) और स्टेशन का सौंदर्यीकरण शामिल है।
3. बाढ़ नियंत्रण और कृषि: समस्तीपुर कोसी और बागमती जैसी नदियों की बाढ़ से प्रभावित रहता है। शांभवी ने केंद्र सरकार से बाढ़ शमन और कोसी नहर परियोजना के लिए विशेष बजट की मांग की है।
4. खेल और युवा: ‘वन बिहार वन गोल’ पहल के तहत उन्होंने समस्तीपुर के हर गांव में स्पोर्ट्स क्लब बनाने और युवाओं को खेल में आगे बढ़ाने का समर्थन किया है।
विरासत और योग्यता का संगम
शांभवी चौधरी केवल एक राजनीतिक परिवार (नीतीश सरकार में मंत्री अशोक चौधरी की बेटी) से नहीं आतीं, बल्कि उनकी अपनी एक मजबूत शैक्षणिक पहचान भी है। लेडी श्री राम कॉलेज और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से समाजशास्त्र में उच्च शिक्षा प्राप्त शांभवी का दृष्टिकोण आधुनिक और प्रशासनिक रूप से संतुलित है। उन्होंने भारत के संविधान का मैथिली भाषा में अनुवाद भी किया है, जिसकी सराहना स्वयं प्रधानमंत्री ने की थी।
शांभवी चौधरी के लिए सांसद निधि का विवाद एक प्रशासनिक चुनौती हो सकता है, लेकिन उनके इरादे समस्तीपुर के बुनियादी ढांचे और सामाजिक चेतना को बदलने के दिखते हैं। ‘सांसद बिटिया’ के रूप में उनकी पहचान और लड़कियों की शिक्षा के लिए उनका समर्पण उन्हें एक नई पीढ़ी की संवेदनशील राजनेता के रूप में स्थापित करता है। अब देखना यह होगा कि आने वाले सालों में उनके ये संकल्प जमीन पर कितनी तेजी से उतरते हैं।


















