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राजेश रंजन ‘पप्पू यादव’ का रिपोर्ट कार्ड: विकास कार्य, MPLADS फंड और संसदीय सक्रियता का पूरा विश्लेषण

बिहार की राजनीति में राजेश रंजन, जिन्हें दुनिया ‘पप्पू यादव’ के नाम से जानती है, एक ऐसा नाम हैं जिनकी पहचान उनकी ‘जमीनी पकड़’ और विवादों से भरे लेकिन सक्रिय राजनीतिक करियर से रही है। कोसी और सीमांचल क्षेत्र के इस कद्दावर नेता ने अब तक छह बार लोकसभा का सफर तय किया है। लेकिन एक सांसद के तौर पर उनका काम कैसा रहा? केंद्र सरकार के MPLADS (सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना) पोर्टल और संसदीय आंकड़ों के जरिए आइए समझते हैं उनके विकास कार्यों का असली लेखा-जोखा।

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सांसद निधि (MPLADS) का उपयोग: मधेपुरा का मॉडल

अगर हम 16वीं लोकसभा (2014-2019) की बात करें, जब पप्पू यादव मधेपुरा का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, तो उनके फंड मैनेजमेंट में एक खास रणनीति देखने को मिली। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उस दौरान मधेपुरा निर्वाचन क्षेत्र के लिए कुल 25 करोड़ रुपये की पात्रता थी। इसमें से सरकार ने 17.50 करोड़ रुपये जारी किए थे

हैरानी की बात यह है कि पप्पू यादव ने जारी किए गए फंड का 99.55% हिस्सा खर्च कर दिया, जो बिहार के सांसदों में सबसे बेहतर प्रदर्शनों में से एक था । उन्होंने विकास के लिए कुल 53.58 करोड़ रुपये के कार्यों की सिफारिश की थी, जो उनकी कुल पात्रता से भी कहीं ज्यादा थी। यह एक सोची-समझी संसदीय रणनीति होती है ताकि अगर कोई प्रोजेक्ट तकनीकी कारणों से रुक जाए, तो दूसरे प्रोजेक्ट के लिए फंड तुरंत तैयार रहे ।

शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा: कहां हुआ काम?

पप्पू यादव के कार्यकाल के दौरान बनाए गए सामुदायिक संपत्तियों में कोसी क्षेत्र की जरूरतों को प्राथमिकता दी गई। उनके द्वारा सुझाए गए कार्यों में मुख्य रूप से शामिल रहे:

  • पीने का पानी और स्वच्छता: ग्रामीण क्षेत्रों में चापाकल और जल मीनारों का निर्माण ।
  • शिक्षा: सरकारी स्कूलों में कमरों का निर्माण और पुस्तकालयों की सुविधा ।
  • ग्रामीण सड़कें: सुदूर गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए पीसीसी सड़कों और पुलियाओं का निर्माण ।
  • स्वास्थ्य: सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार और स्वास्थ्य उपकरणों की व्यवस्था ।

संसद में प्रदर्शन: औसत से कहीं आगे

पप्पू यादव की सक्रियता केवल फंड खर्च करने तक सीमित नहीं रही। 16वीं लोकसभा के दौरान सदन में उनकी भागीदारी राष्ट्रीय और राज्य के औसत से बहुत अधिक थी:

  • बहस में हिस्सा: उन्होंने 228 बहसों में भाग लिया, जबकि राष्ट्रीय औसत केवल 67.1 था ।
  • सवाल पूछना: उन्होंने जनता से जुड़े 332 सवाल उठाए ।
  • प्राइवेट मेंबर बिल: उन्होंने 22 निजी विधेयक पेश किए, जो संसदीय सक्रियता का एक बड़ा प्रमाण है 。

उन्होंने शिक्षा ऋण (Education Loan) माफी, बिहार में कानून व्यवस्था, और बाढ़-सुखाड़ जैसी गंभीर समस्याओं पर लगातार आवाज उठाई 。

18वीं लोकसभा: पूर्णिया के लिए नया एजेंडा

2024 में निर्दलीय सांसद के रूप में पूर्णिया लौटने के बाद पप्पू यादव का एजेंडा अब और अधिक औद्योगिक और आर्थिक विकास की ओर मुड़ा है। उनके वर्तमान प्रमुख लक्ष्यों में शामिल हैं:

  1. राष्ट्रीय मखाना विकास बोर्ड: पूर्णिया में मखाना उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए बोर्ड की स्थापना की मांग ।
  2. पूर्णिया एयरपोर्ट: हवाई अड्डे के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे को बढ़ाने और निर्माण कार्य में तेजी लाने की वकालत 。
  3. औद्योगिकीकरण: पूर्णिया, अररिया और किशनगंज में चीनी, दूध, मक्का और चाय की फैक्ट्रियां लगाने की मांग ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सके ।

मानवीय दृष्टिकोण और ‘रॉबिनहुड’ छवि

पप्पू यादव का विकास कार्य अक्सर सरकारी फाइलों से बाहर निकलकर सीधे लोगों के बीच भी दिखता है। हालांकि, यह कई बार कानूनी विवादों का कारण भी बनता है। अक्टूबर 2025 में, वैशाली में बाढ़ पीड़ितों को नकद पैसे बांटने के कारण उन पर आदर्श आचार संहिता (MCC) के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया । लेकिन उन्होंने इसे अपना ‘मानवीय धर्म’ बताते हुए बचाव किया। यह उनकी उसी छवि को दर्शाता है जहां वे प्रशासनिक देरी के बजाय तुरंत मदद पहुंचाने में विश्वास रखते हैं।

संपत्ति और कानूनी चुनौतियां

पप्पू यादव के करियर का एक पहलू उनके कानूनी मामले और संपत्ति की वृद्धि भी है। 2004 के चुनावी हलफनामे में उनकी घोषित संपत्ति लगभग 31 लाख रुपये थी, जो 2024 तक बढ़कर 12.08 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई है । वहीं, 2024 के हलफनामे में उन पर 41 लंबित आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें दंगा और सरकारी काम में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल हैं

कुल मिलाकर, राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का कार्यकाल डेटा के आइने में एक ‘अति-सक्रिय’ जन-प्रतिनिधि का नजर आता है। चाहे वह सांसद निधि का शत-प्रतिशत उपयोग हो या संसद में औसत से अधिक सवाल पूछना, वे कोसी-सीमांचल की आवाज बनने की पुरजोर कोशिश करते रहे हैं। पूर्णिया एयरपोर्ट और मखाना बोर्ड जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर उनकी सफलता आने वाले वर्षों में उनके राजनीतिक प्रभाव और विकास की विरासत को तय करेगी।

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