बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर अक्सर राष्ट्रीय मंचों पर चर्चा होती रही है, लेकिन हाल ही में दिल्ली से आई एक खबर ने राज्य के लिए गर्व का पल पैदा कर दिया है। 30 दिसंबर, 2025 को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 46वें विश्व प्रबंधन कांग्रेस (World Management Congress) में बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार को ‘बेस्ट एजुकेशन मिनिस्टर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान न केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि है, बल्कि यह बिहार के बदलते शिक्षा परिदृश्य की एक अंतरराष्ट्रीय गूँज भी है।

दिल्ली के मंच पर बिहार का नाम
इस अंतरराष्ट्रीय समागम का मुख्य विषय “भारत में लचीले राज्यों का निर्माण: नवाचारी उच्च शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से अनुकूलन” था। इस मंच पर सुनील कुमार को शिक्षा के क्षेत्र में उनके क्रांतिकारी सुधारों और दूरदर्शी पहलों के लिए चुना गया। यह सम्मान उनके द्वारा बिहार की स्कूली शिक्षा, डिजिटल लर्निंग और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में लाए गए सकारात्मक बदलावों की पुष्टि करता है।
इसी समारोह में बिहार के उच्च शिक्षा निदेशक, डॉ. एन.के. अग्रवाल को भी ‘नेशनल हायर एजुकेशन एडमिनिस्ट्रेशन एक्सीलेंस अवार्ड’ से नवाजा गया। यह दोहरा सम्मान दर्शाता है कि बिहार में अब नीति-निर्धारण और उसके प्रशासनिक क्रियान्वयन के बीच एक मजबूत तालमेल बन रहा है।
एक अनुशासित नेतृत्व: सुनील कुमार का सफर
सुनील कुमार का व्यक्तित्व केवल एक राजनीतिज्ञ का नहीं है। 1988 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी के रूप में उनकी पृष्ठभूमि ने शिक्षा विभाग में एक नई अनुशासन की लहर पैदा की है। सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली से इतिहास में एम.ए. करने वाले सुनील कुमार ने मार्च 2024 में जब से कार्यभार संभाला है, उनका ध्यान व्यवस्था को पेशेवर बनाने पर रहा है।
उन्होंने न केवल बड़े पैमाने पर शिक्षकों की भर्ती की चुनौतियों को स्वीकार किया, बल्कि विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी प्राथमिकता दी। उदाहरण के तौर पर, हाल ही में उन्होंने एक कैबिनेट मंत्री की नियुक्ति से जुड़ी विसंगतियों को जांच के लिए वापस भेजकर यह स्पष्ट कर दिया कि योग्यता और नियम सर्वोपरि हैं।
सात निश्चय-3: ‘उन्नत शिक्षा – उज्ज्वल भविष्य’
बिहार सरकार अब ‘सात निश्चय-3’ (2025-2030) के रोडमैप पर काम कर रही है। इसमें शिक्षा के लिए ‘उन्नत शिक्षा – उज्ज्वल भविष्य’ का संकल्प लिया गया है। इस योजना के तहत राज्य के पुराने और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जा रहा है।
सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना है बिहार में एक नई ‘एजुकेशन सिटी’ का निर्माण। यह प्रोजेक्ट बिहार के मेधावी युवाओं को राज्य में ही रहकर उच्च स्तरीय शोध और नवाचार के अवसर प्रदान करेगा। प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की विरासत को ध्यान में रखते हुए, यह नई एजुकेशन सिटी आधुनिक सुविधाओं, डिजिटल लैब और एआई-आधारित लर्निंग टूल्स से लैस होगी।
बुनियादी बदलाव और डिजिटल क्रांति
बिहार में नामांकन (Enrollment) दर में तो सुधार हुआ ही है, लेकिन असली चुनौती सीखने की गुणवत्ता (Learning Quality) में सुधार की थी। एएसईआर (ASER) 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में कक्षा 5 के छात्रों के पढ़ने के स्तर में सुधार देखा गया है, जो 2022 के 37.1% से बढ़कर 2024 में 41.2% हो गया है।
डिजिटल पहुंच के मामले में भी बिहार के किशोर राष्ट्रीय औसत को टक्कर दे रहे हैं। बिहार के करीब 82.1% किशोरों के पास स्मार्टफोन है और वे सूचना खोजने या व्हाट्सएप का उपयोग करने में काफी कुशल हैं। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने इसी डिजिटल साक्षरता को शिक्षा के साथ जोड़ने के लिए ‘पर्सनलाइज्ड एंड अडैप्टिव लर्निंग’ (PAL) मॉडल और स्थानीय भाषाओं में डिजिटल सामग्री तैयार करने पर जोर दिया है।
चुनौतियां और भविष्य की राह
पुरस्कार और सम्मान उत्साह तो बढ़ाते हैं, लेकिन यह अभी एक लंबी यात्रा की शुरुआत है। बिहार में अभी भी शिक्षकों के पदों को भरने और उच्च प्राथमिक स्तर पर ड्राप-आउट दर को कम करने जैसी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
Confederation of Indian Universities और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों द्वारा दिया गया यह ‘बेस्ट एजुकेशन मिनिस्टर’ अवार्ड सुनील कुमार और उनकी टीम के लिए एक प्रेरणा का काम करेगा। यह अवार्ड इस बात का प्रमाण है कि यदि सही नीति और ईमानदार प्रशासन हो, तो बिहार जैसा राज्य भी शिक्षा के वैश्विक नक्शे पर अपनी जगह बना सकता है। 2030 तक बिहार को एक ‘नॉलेज हब’ बनाने का जो सपना ‘सात निश्चय-3’ में देखा गया है, यह पुरस्कार उस दिशा में एक ठोस कदम है।


















