29 जनवरी 2026 का दिन बिहार के औद्योगिक विकास के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 32 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें ‘बिहार ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) पॉलिसी 2026’ सबसे प्रमुख थी । इस नीति के साथ बिहार अब देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जिनके पास आईटी (IT) और मल्टिनैशनल कंपनियों को आकर्षित करने के लिए एक समर्पित रोडमैप है।
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जारी अधिसूचना संख्या 183 (दिनांक 31.01.2026) के माध्यम से इस नीति को लागू किया गया है । इसका मुख्य उद्देश्य बिहार को पूर्वी भारत के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी हब के रूप में स्थापित करना और ‘रिवर्स माइग्रेशन’ (बाहर गए बिहार के युवाओं की घर वापसी) को बढ़ावा देना है ।

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GCC पॉलिसी 2026 की मुख्य विशेषताएं
बिहार सरकार ने इस नीति को देश की सबसे आकर्षक नीतियों में से एक बनाने के लिए भारी सब्सिडी और छूट का प्रावधान किया है:
- भारी कैपिटल सब्सिडी (Capex Subsidy): बिहार में GCC (जैसे आईटी सर्विसेज, फाइनेंस, अकाउंटिंग, रिसर्च और मैनेजमेंट सेंटर) स्थापित करने वाली कंपनियों को उनके कुल निवेश (Capex) पर 30% की सब्सिडी दी जाएगी। इसकी अधिकतम सीमा ₹50 करोड़ तय की गई है ।
- रोजगार प्रोत्साहन (Employment Incentives): कंपनियों को बिहार के युवाओं को नौकरी देने पर विशेष बोनस मिलेगा। यदि कंपनी बिहार के मूल निवासियों (Domicile of Bihar) को नियुक्त करती है, तो उसे सरकार की तरफ से “अतिरिक्त सब्सिडी” (Increased Subsidy) दी जाएगी ।
- स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन में 100% छूट: आईटी और आईटीईएस (IT/ITES) इकाइयों के लिए स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस पर पूरी तरह से छूट दी गई है ।
- ₹1 में जमीन: नीति के तहत, निवेश की शर्तों को पूरा करने वाले बड़े उद्यमियों को ₹100 करोड़ के प्रोजेक्ट निवेश पर 1 एकड़ जमीन महज ₹1 के टोकन अमाउंट पर दी जा सकती है।
पटना और दरभंगा बनेंगे डिजिटल हब
सरकार ने केवल कागजों पर ही नहीं, बल्कि जमीन पर भी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना शुरू कर दिया है।
- पटना: गांधी मैदान के पास बिस्कोमान टॉवर की चुनिंदा मंजिलों को आईटी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए आवंटित किया गया है । यहाँ कई स्टार्टअप्स को ‘प्लग-एंड-प्ले’ वर्कस्पेस मुफ्त में दिए जा रहे हैं। इसके अलावा पाटलिपुत्र इंडस्ट्रियल एरिया में ₹53.10 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक STPI सेंटर बनाया गया है ।
- दरभंगा: मिथिलांचल के युवाओं के लिए दरभंगा के आईटीई (ITI) लहेरियासराय परिसर में ₹10 करोड़ की लागत से नया STPI सेंटर खोला गया है, जहाँ 76 प्लग-एंड-प्ले सीटें उपलब्ध हैं ।
निवेशकों के लिए ‘सिंगल विंडो’ की सुविधा
निवेशकों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए बिहार सरकार ने सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम (SWCS) को और मजबूत किया है। अब निवेशक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए स्टेज-1 की मंजूरी ले सकते हैं और 30 दिनों के भीतर सभी आवश्यक क्लीयरेंस और लाइसेंस प्राप्त कर सकते हैं । साथ ही, सामान्य प्रशासन विभाग को आईएसओ (ISO) सर्टिफिकेशन मिलने से सरकारी कामकाज की पारदर्शिता और गुणवत्ता और भी बेहतर हुई है ।
बिहार की इस नीति का महत्व क्यों है?
देश भर में कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य पहले से ही GCC के क्षेत्र में बड़े खिलाड़ी हैं। लेकिन बिहार ने अपनी नीति में ‘डोमिसाइल प्रीमियम’ और ‘लो कॉस्ट ऑपरेशंस’ पर ध्यान दिया है। बिहार में टियर-2 और टियर-3 शहरों में ऑफिस रेंटल और टैलेंट की लागत बड़े महानगरों (जैसे बेंगलुरु या पुणे) की तुलना में 15-25% कम है । यह नीति उन कंपनियों के लिए बेहतरीन मौका है जो अपनी लागत कम करना चाहती हैं और एक बड़े टैलेंट पूल तक पहुंचना चाहती हैं
बिहार ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पॉलिसी 2026 केवल एक सरकारी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह बिहार के एक ‘विकसित बिहार’ (Viksit Bihar) बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है । 2030 तक भारत के GCC सेक्टर के $110 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, और बिहार इस बढ़ते बाजार में अपनी बड़ी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है ।














