बिहार की मिट्टी की खुशबू अब सात समंदर पार दुबई की गलियों में महकने वाली है। आगामी 26 से 30 जनवरी 2026 तक दुबई में आयोजित होने वाले दुनिया के सबसे बड़े खाद्य प्रदर्शनी ‘गल्फ फूड फेस्टिवल’ (Gulfood 2026) में बिहार के जीआई (Geographical Indication) टैग प्राप्त उत्पादों का जलवा देखने को मिलेगा । यह सिर्फ एक व्यापारिक आयोजन नहीं है, बल्कि बिहार के किसानों और उनके पारंपरिक हुनर के लिए गर्व का क्षण है।
जनता दल (यूनाइटेड) की प्रदेश प्रवक्ता अंजुम आरा ने हाल ही में साझा किया कि बिहार के जीआई प्रोडक्ट्स को इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर पेश करना हमारे कृषि क्षेत्र के लिए एक क्रांतिकारी कदम होगा । इससे न केवल हमारे उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय किसानों की आमदनी में भी जबरदस्त इजाफा होगा।

भारत: आधिकारिक भागीदार देश
इस बार का गल्फ फूड फेस्टिवल भारत के लिए बेहद खास है क्योंकि भारत को इस आयोजन का ‘आधिकारिक भागीदार देश’ (Official Partner Country) नामित किया गया है । वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत APEDA (एपिडा) के नेतृत्व में भारत का अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल यहां हिस्सा लेगा, जिसमें 600 से अधिक प्रदर्शक शामिल होंगे । दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और दुबई एक्जीबिशन सेंटर (एक्सपो सिटी) जैसे दो बड़े वेन्यू पर फैले इस मेले में बिहार के उत्पादों को एक प्रमुख स्थान दिया जाएगा ।
बिहार के ‘GI स्टार्स’ जो जीतेंगे दुनिया का दिल
बिहार अपने पास कई ऐसे अनमोल उत्पाद रखता है जिन्हें उनकी विशिष्टता के लिए जीआई टैग मिला हुआ है। गल्फ फूड 2026 में इन उत्पादों पर खास नजर रहेगी:
- मिथिला मखाना (Mithila Makhana): यह बिहार का असली ‘सुपरफूड’ है। भारत के कुल मखाना उत्पादन का लगभग 90% हिस्सा अकेले बिहार से आता है । इसकी पौष्टिकता और स्वाद के कारण मिडिल ईस्ट के बाजारों में इसकी भारी मांग है।
- शाही लीची (Shahi Litchi): मुजफ्फरपुर की यह रसीली लीची अपनी मिठास और खुशबू के लिए दुनिया भर में मशहूर है ।
- भागलपुरी जरदालु आम (Bhagalpuri Zardalu Mango): अपनी सुनहरी रंगत और खास सुगंध के लिए जाना जाने वाला यह आम विदेशी खरीदारों की पहली पसंद बन सकता है ।
- कतरनी और मर्चा चावल (Katarni & Marcha Rice): जहां कतरनी चावल अपनी सुगंध के लिए जाना जाता है, वहीं मर्चा चावल (काली मिर्च जैसा दिखने वाला) अपनी अनोखी बनावट के लिए चर्चा में है ।
- सिलाओ खाजा (Silao Khaja): नालंदा के सिलाओ का यह पारंपरिक बहु-परतीय मीठा व्यंजन अपनी कुरकुराहट के साथ विदेशी मेहमानों का मुंह मीठा करेगा ।
मखाना क्रांति: स्थानीय से ग्लोबल तक का सफर
मखाना सेक्टर ने पिछले पांच वर्षों में अभूतपूर्व प्रगति की है। 2020 में जहां इसकी खेती लगभग 25,000 हेक्टेयर में होती थी, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 40,000 हेक्टेयर तक पहुंच गई है । इतना ही नहीं, मखाने का निर्यात 2020 के 6,700 मीट्रिक टन से बढ़कर 2024 में 25,130 मीट्रिक टन हो गया है । दुबई का यह मेला मखाना उत्पादों जैसे ‘फ्लेवर्ड मखाना’ (पेरी-पेरी, चॉकलेट, मिंट) और मखाना आटा के लिए नए रास्ते खोलेगा।
‘BHARATI’ और सरकारी सहयोग
बिहार के कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में पटना में ‘BHARATI’ (Bharat’s Hub for Agritech, Resilience, Advancement, and Incubation for Export Enablement) पहल की शुरुआत की गई है । यह स्टार्टअप्स और किसानों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में मदद करती है। साथ ही, दुबई में ‘भारत मार्ट’ की स्थापना से बिहार के छोटे और मध्यम निर्यातकों के लिए लॉजिस्टिक्स और भंडारण की समस्या भी आसान हो जाएगी ।
एपिडा (APEDA) इस मेले में भाग लेने वाले निर्यातकों को स्टाल आवंटन, उत्पाद प्रदर्शन और खरीदारों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने में पूरी सहायता प्रदान कर रहा है । 2026 के इस आयोजन में एआई (AI) और डिजिटल ट्रेसबिलिटी का उपयोग किया जाएगा, जिससे विदेशी खरीदार हमारे जीआई उत्पादों की शुद्धता और उनके मूल स्थान की पुष्टि कर सकेंगे ।
गल्फ फूड फेस्टिवल 2026
गल्फ फूड 2026 बिहार के लिए महज एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में अपनी धाक जमाने का एक बड़ा अवसर है। जब हमारे मखाने की चमक और लीची की मिठास दुबई के मंच पर होगी, तो इसका सीधा लाभ बिहार के गांवों में बैठे उन लाखों किसानों को मिलेगा जिनकी मेहनत इन उत्पादों में छिपी है । उम्मीद है कि यह पांच दिवसीय आयोजन ‘conversations into contracts’ (बातों को व्यापारिक समझौतों) में बदलकर बिहार के आर्थिक विकास की नई कहानी लिखेगा ।
















