देश की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आ गया है। बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड (BSEB) ने वो कर दिया जो अब तक कोई भी राज्य बोर्ड नहीं कर पाया था – एक साथ तीनों ISO सर्टिफिकेट हासिल किए हैं। यह सिर्फ एक सर्टिफिकेट नहीं, बल्कि सिस्टम की गुणवत्ता का सबूत है।

क्या मिले बिहार बोर्ड को?
BSEB को मिले हैं तीन अलग-अलग ISO प्रमाणपत्र:
ISO 9001:2015 – गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली के लिए। इसका मतलब है कि बोर्ड के काम करने का तरीका अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता पर है।
ISO 27001:2022 – सूचना सुरक्षा के लिए। सभी स्टूडेंट डेटा और संवेदनशील जानकारी पूरी सुरक्षा के साथ संभाली जा रही है।
ISO 15489-1:2016 – रिकॉर्ड मैनेजमेंट के लिए। 1983 से लेकर 2025 तक के सभी रिकॉर्ड डिजिटल कर दिए गए हैं।
CBSE से भी आगे का बोर्ड
अब आप सोचेंगे कि यह कितना बड़ा सपना था? हकीकत यह है कि देश का सबसे बड़ा बोर्ड CBSE को भी अब तक सिर्फ दो ISO सर्टिफिकेट ही मिले हैं। बिहार बोर्ड ने तीनों पर खरा उतरकर सभी को पछाड़ दिया है।
सात साल लगातार परिणाम पहले
बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर ने बताया कि बिहार बोर्ड पिछले सात साल से लगातार मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा के परिणाम सबसे पहले घोषित कर रहा है। 2019 से लेकर 2025 तक, यह परंपरा टूटी नहीं है। यह सिर्फ गति नहीं है – यह पारदर्शिता का सबूत है।
डिजिटल क्रांति जो सच में काम आई
बोर्ड के 96 लाख स्टूडेंट्स के डेटा को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, पूरा सिस्टम ऑनलाइन फैसिलिटेशन सिस्टम (OFSS) पर चल रहा है। 2018 के बाद से ग्यारहवीं कक्षा में दाखिला पूरी तरह ऑनलाइन है।
और भी दिलचस्प बात यह है – एक 200 टेराबाइट की डेटा सेंटर बनाई गई है। समझ सकते हैं ना, कितनी बड़ी सुरक्षा है?
कागज से आजादी
बोर्ड अब पेपरलेस संगठन बनने की ओर बढ़ रहा है। सभी दस्तावेज डिजिटल हो चुके हैं। ERP सिस्टम से फाइलें अब डिजिटल तरीके से चलती हैं। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन से लेकर ई-एडमिट कार्ड, फीस जमा करना और रिजल्ट घोषित करना – सब कुछ तेजी से हो रहा है।
ISO सर्टिफिकेट से पहले बिहार बोर्ड को PM Award for Excellence in Public Administration मिल चुका था। तो ये सिर्फ कागज के टुकड़े नहीं हैं – ये सुधार का दस्तावेज हैं।
बिहार के लिए क्या मायने है?
जब एक शिक्षा बोर्ड इतना तकनीकी और पारदर्शी हो जाता है, तो यह पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए सकारात्मक संदेश देता है। अगर परीक्षा देने वाली कक्षाएं इतनी सुव्यवस्थित हैं, तो सुधार की सुगंध पूरे सिस्टम में फैलने लगती है।
बिहार बोर्ड की यह उपलब्धि सिर्फ ISO सर्टिफिकेट नहीं है। यह साबित करती है कि सही नीति, तकनीक और मेहनत से किसी भी संस्था को बदला जा सकता है। और जब शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में यह सुधार आता है, तो उसका असर पीढ़ियों तक दिखता है। बिहार को अपने बोर्ड पर गर्व करना चाहिए।
















