Mobile Only Menu
  • Home
  • संस्कृति
  • देवउठनी एकादशी 2025 : बिहार की परंपरा और नए शुभ कार्यों का आरंभ
Tulsi Vivah

देवउठनी एकादशी 2025 : बिहार की परंपरा और नए शुभ कार्यों का आरंभ

बिहार की संस्कृति में, देवउठनी एकादशी का दिन एक पर्व नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक उत्सव है। इसे प्रबोधिनी एकादशी या देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है। यह वह पावन तिथि है जिसका इंतजार चार माह से हर आस्थावान व्यक्ति करता है। इस दिन यह मान्यता है कि सृष्टि के पालक भगवान विष्णु अपनी चार महीने की योग निद्रा (जिसे चातुर्मास कहते हैं) से जागते हैं, और इसी के साथ पृथ्वी पर सभी शुभ और मांगलिक कार्यों का पुनः आरंभ हो जाता है।

भगवान विष्णु का जागरण और चातुर्मास का समापन

हिंदू धर्म में, ऐसी मान्यता है कि आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी (देवशयनी एकादशी) से भगवान विष्णु क्षीर सागर में शयन के लिए चले जाते हैं। इन चार महीनों के दौरान (चातुर्मास), विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे सभी शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं। जब कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि आती है, तो भगवान विष्णु अपनी निद्रा का त्याग करते हैं और सृष्टि का कार्यभार संभालते हैं। इसीलिए, इस दिन को देवउठनी या देवोत्थान कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘देवताओं का उठना’।

बिहार में ‘अरिपन’ और विशेष पूजा

बिहार में इस पर्व को मनाने की अपनी एक विशेष और मनमोहक शैली है। इस दिन घर के आंगन या पूजा स्थल पर चावल के पिसे हुए घोल (जिसे कहीं-कहीं चंदन या अन्य रंगों से भी मिलाया जाता है) से अरिपन (पारंपरिक लोक कला रंगोली) बनाया जाता है। यह अरिपन मुख्य रूप से भगवान विष्णु के आगमन और स्वागत के लिए बनाया जाता है, जिसमें कमल, शंख, चक्र, गदा, सूर्य, चंद्रमा, और तुलसी विवाह के प्रतीकात्मक चित्र बनाए जाते हैं।

पूजा की विधि में एक मंडप बनाया जाता है, जिसे आमतौर पर गन्ने के चार डंडों से सजाया जाता है। इस मंडप में भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप की विधिवत पूजा की जाती है। इस दौरान भक्तजन “उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पतये…” जैसे मंत्रों का उच्चारण कर भगवान को योग निद्रा से उठने का आह्वान करते हैं। रात्रि में दीपमालाएं जलाई जाती हैं और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जिसे ‘रात्रि जागरण’ भी कहा जाता है।

Tulsi Vivah

AI Image

व्रत की परंपरा: फलाहार और सात्विक भोजन

देवउठनी एकादशी के दिन भक्तजन कठोर व्रत रखते हैं। इस व्रत में अनाज (चावल, गेहूं) का सेवन पूरी तरह से वर्जित होता है। व्रत के दौरान मुख्य रूप से फलाहार का सेवन किया जाता है। बिहार में व्रत के भोजन में मखाना (फॉक्स नट्स), दूध, दही, फल, और शकरकंद का विशेष महत्व है। इस सात्विक भोजन का उद्देश्य शरीर और मन को शुद्ध कर, भगवान विष्णु के प्रति अपनी आस्था और समर्पण को व्यक्त करना है। यह व्रत पापों का नाश कर मोक्ष की ओर ले जाने वाला माना जाता है।

तुलसी विवाह: मांगलिक कार्यों की शुरुआत

देवउठनी एकादशी के ठीक अगले दिन (द्वादशी तिथि) तुलसी विवाह का भव्य आयोजन होता है। इस दिन शालिग्राम (भगवान विष्णु का पाषाण स्वरूप) और तुलसी माता का विवाह पूरे विधि-विधान और पारंपरिक शादी की धूमधाम के साथ कराया जाता है। तुलसी को भगवान विष्णु की ‘प्रिया’ (प्रिय पत्नी) माना जाता है।

यह विवाह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि अब भगवान उठ चुके हैं, और इसी के साथ विवाह-विवाह का सीजन (मांगलिक कार्यों का मौसम) भी शुरू हो गया है। जिन दंपत्तियों को कन्यादान का पुण्य प्राप्त नहीं होता, वे तुलसी विवाह करवाकर वह पुण्य प्राप्त करते हैं।

इस प्रकार, देवउठनी एकादशी बिहार में धार्मिक आस्था, पारंपरिक लोक कला (अरिपन), व्रत और उत्सव का एक सुंदर संगम है, जो कार्तिक मास के आगमन के साथ ही लोगों के जीवन में नए उल्लास और शुभता का संचार करता है। यह दिन बताता है कि कैसे हमारी परंपराएं जीवन के हर पहलू को उत्सव से जोड़ती हैं।

Dev Uthani Ekadashi 2025 Date and time

पर्व का नामतिथि (Date)वार (Day)
देवउठनी एकादशी1 नवंबर 2025शनिवार
तुलसी विवाह2 नवंबर 2025रविवार

Releated Posts

15 अप्रैल 2026 मासिक शिवरात्रि: प्रदोष व्रत के साथ बन रहा है ‘शिव योग’, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

हिंदू धर्म में शिव भक्ति के लिए वैसे तो हर दिन उत्तम है, लेकिन ‘मासिक शिवरात्रि’ का अपना…

ByByHarshvardhan Apr 6, 2026

वरूथिनी एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, 2026 में वरूथिनी एकादशी सोमवार, 13 अप्रैल को मनाई जाएगी । विशेष विवरण समय…

ByByHarshvardhan Apr 6, 2026

पापमोचनी एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा की पूरी जानकारी

वर्ष 2026 में पापमोचनी एकादशी का व्रत बहुत ही खास संयोगों के साथ आ रहा है। यह चैत्र…

ByByHarshvardhan Mar 15, 2026

मुंगेर सीताकुंड माघी मेला 2026: 31 जनवरी से शुरू, राजकीय दर्जा और पूरी जानकारी

बिहार के मुंगेर जिले में स्थित ऐतिहासिक और पौराणिक सीताकुंड परिसर एक बार फिर लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत…

ByByManvinder Mishra Jan 30, 2026

गणेश जयंती 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि | तिलकुण्ड चतुर्थी का महत्व

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को ‘विघ्नहर्ता’ और ‘मंगलमूर्ति’ के रूप में पूजा जाता है। वैसे तो हर…

ByByPrachi Singh Jan 18, 2026

बिहार शिवलिंग स्थापना : विराट रामायण मंदिर में रचा गया नया इतिहास

17 जनवरी 2026 का दिन बिहार के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। बिहार के…

ByByManvinder Mishra Jan 17, 2026

नरक निवारण चतुर्दशी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और राजा श्वेत की पौराणिक कथा

हिंदू धर्म में चतुर्दशी तिथि का बहुत महत्व है, लेकिन माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी बेहद…

ByByHarshvardhan Jan 15, 2026

वसंत पंचमी 2026: सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त, तारीख और पूरी पूजा विधि

सर्दियों की विदाई और गुनगुनी धूप के साथ जब सरसों के खेत पीले रंगों से लद जाते हैं,…

ByByPrachi Singh Jan 14, 2026

उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रसिद्ध सरनेम: पहचान और गौरव का सदियों पुराना सफर

उत्तर प्रदेश और बिहार की गलियों में जब कोई अपना परिचय देता है, तो अक्सर नाम के पीछे…

ByByManvinder Mishra Jan 13, 2026
2 Comments Text
  • b"asta binance h"anvisningskod says:
    Your comment is awaiting moderation. This is a preview; your comment will be visible after it has been approved.
    Can you be more specific about the content of your article? After reading it, I still have some doubts. Hope you can help me.
  • binance register says:
    Your comment is awaiting moderation. This is a preview; your comment will be visible after it has been approved.
    Your point of view caught my eye and was very interesting. Thanks. I have a question for you. https://accounts.binance.info/hu/register-person?ref=IQY5TET4
  • Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    Scroll to Top