Mobile Only Menu
  • Home
  • ब्लॉग
  • बिहार की सानिया किन्नर: मज़ाक उड़ाने वालों के बीच पहनी पुलिस की वर्दी, अब दुनिया ठोकती है सलाम!
सानिया किन्नर बिहार पुलिस

बिहार की सानिया किन्नर: मज़ाक उड़ाने वालों के बीच पहनी पुलिस की वर्दी, अब दुनिया ठोकती है सलाम!

बिहार के सामाजिक परिवेश में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कल तक जिस ट्रांसजेंडर समुदाय को समाज उपेक्षा और उपहास की दृष्टि से देखता था, आज उसी समुदाय की एक जांबाज सदस्य, सानिया किन्नर, पुलिस की वर्दी पहनकर कानून की रक्षा कर रही हैं। सानिया की कहानी केवल एक नौकरी पाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, तिरस्कार और फिर सम्मान पाने की एक ऐसी मिसाल है जो बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गई है ।

सानिया किन्नर बिहार पुलिस

कौन हैं सानिया किन्नर?

सारण जिले के रिविलगंज की रहने वाली सानिया का जन्म नाम सन्नी कुमार राम था । उनका जन्म एक सैनिक परिवार में हुआ था, जहाँ अनुशासन और पारंपरिक मूल्यों का कड़ा पालन होता था। सानिया ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के साथ-साथ मैट्रिक, इंटर और फिर बीएससी (BSc) तक की पढ़ाई पूरी की । पढ़ाई में अच्छी होने के बावजूद, जब उनकी लैंगिक पहचान (Gender Identity) सामने आई, तो समाज और परिवार का व्यवहार उनके प्रति पूरी तरह बदल गया।

सानिया के पिता ने उनसे बातचीत करना बंद कर दिया, जो आज भी जारी है । समाज के तानों और तिरस्कार से तंग आकर सानिया ने अपना घर छोड़ दिया और गोपालगंज के थावे में किन्नरों की एक मंडली में शामिल हो गईं । वहां उन्होंने ट्रेनों में शगुन मांगकर और नाच-गाकर अपना जीवन यापन शुरू किया। लेकिन उनके मन में कुछ बड़ा करने की टीस हमेशा बनी रही।

ट्रेनों में ताली बजाने से वर्दी पहनने का सपना

सानिया बताती हैं कि ट्रेनों में पैसे मांगते वक्त लोग अक्सर उन पर फब्तियां कसते थे और उनका मजाक उड़ाते थे । लेकिन सानिया ने अपनी शिक्षा को व्यर्थ नहीं जाने दिया। जब बिहार सरकार ने पुलिस भर्ती में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए रास्ते खोले, तो सानिया ने इसे एक मौके के रूप में देखा। उन्होंने शगुन मांगने के काम के साथ-साथ पुलिस भर्ती की तैयारी शुरू की।

सानिया ने शारीरिक दक्षता परीक्षा (Physical Test) के लिए कड़ी मेहनत की। वह सुबह-सुबह ट्रेनिंग के लिए जाती थीं, जहाँ लोग उन्हें ‘छक्का’ कहकर चिढ़ाते थे । लेकिन सानिया ने अपनी दौड़ और ऊँची कूद पर ध्यान केंद्रित किया। उनकी मेहनत रंग लाई और उनका चयन बिहार होमगार्ड के जवान के रूप में हो गया । आज वह सारण के दाउदपुर थाने में तैनात हैं और गर्व से अपनी ड्यूटी निभा रही हैं ।

बिहार पुलिस में ट्रांसजेंडर भर्ती की नई नीति

सानिया की यह सफलता बिहार सरकार और पटना उच्च न्यायालय के एक ऐतिहासिक फैसले की देन है। साल 2021 में पटना हाईकोर्ट के निर्देश के बाद बिहार सरकार ने ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा में लाने के लिए पुलिस भर्ती में विशेष प्रावधान किए।

  • आरक्षण नीति: बिहार पुलिस में अब हर 500 पदों पर एक पद ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए आरक्षित किया गया है ।
  • OBC श्रेणी: ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को पिछड़ा वर्ग (BC) अनुसूची-2 के तहत आरक्षण का लाभ दिया जाता है ।
  • शारीरिक मापदंड: भर्ती प्रक्रिया में ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों के लिए शारीरिक मानक महिला उम्मीदवारों के समान रखे गए हैं ।
मानकट्रांसजेंडर उम्मीदवारों के लिए विवरण
न्यूनतम ऊंचाई155 सेंटीमीटर
न्यूनतम वजन48 किलोग्राम
आयु सीमा18 से 42 वर्ष (आरक्षण के अनुसार छूट शामिल)
शैक्षणिक योग्यता10+2 (इंटरमीडिएट) उत्तीर्ण

मज़ाक से सलामी तक का बदलाव

वर्दी पहनने के बाद सानिया के जीवन में सबसे बड़ा बदलाव लोगों के नज़रिए में आया है। वह कहती हैं, “जो लोग पहले मुझे देखकर हंसते थे, आज वही लोग मुझे पुलिस की वर्दी में देखकर सलाम ठोकते हैं” पुलिस विभाग के भीतर भी उन्हें सम्मान मिल रहा है। सारण के पुलिस अधिकारियों ने भी सानिया की निष्ठा और मेहनत की सराहना की है 。

हालांकि, सानिया के लिए यह रास्ता अभी भी पूरी तरह आसान नहीं है। उनके पिता आज भी उनसे बात नहीं करते हैं, जिससे उन्हें मानसिक पीड़ा होती है । लेकिन उनकी मां और भाई अब उनकी सफलता पर गर्व महसूस करते हैं। सानिया केवल होमगार्ड बनकर ही रुकना नहीं चाहतीं, बल्कि उनका अगला लक्ष्य बिहार पुलिस में दारोगा (सब-इंस्पेक्टर) बनना है और वह इसके लिए पढ़ाई भी कर रही हैं 。

समाज के लिए एक बड़ा संदेश

सानिया किन्नर के साथ-साथ बिहार में मानवी मधु कश्यप, रोहित झा और बंटी कुमार जैसे अन्य ट्रांसजेंडर भी सब-इंस्पेक्टर बनकर इतिहास रच चुके हैं । कैमूर के रचित राज बिहार के पहले ट्रांस-मैन कांस्टेबल बने । इन युवाओं की सफलता यह साबित करती है कि ट्रांसजेंडर समुदाय केवल मांगलिक कार्यों में नाचने-गाने के लिए नहीं है, बल्कि वे प्रशासनिक पदों पर बैठकर देश की सेवा भी कर सकते हैं।

सानिया का कहना है कि उनके समुदाय के लोगों को भी भीख मांगने या केवल शगुन लेने के बजाय शिक्षा और मेहनत पर ध्यान देना चाहिए । सरकार की इन पहलों से न केवल ट्रांसजेंडर समुदाय का आर्थिक सशक्तिकरण हो रहा है, बल्कि समाज में उनके प्रति जो रूढ़िवादी सोच थी, वह भी धीरे-धीरे टूट रही है।

Releated Posts

बिहार ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) पॉलिसी 2026: अब बिहार बनेगा नया IT हब, युवाओं के लिए खुलेंगे नौकरियों के द्वार!

29 जनवरी 2026 का दिन बिहार के औद्योगिक विकास के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ। मुख्यमंत्री नीतीश…

ByByPrachi Singh Feb 9, 2026

मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना 2026: बिहार के युवाओं को मिल रहे ₹1000 हर महीने, जानें पूरी जानकारी

बिहार सरकार ने राज्य के युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और हुनरमंद बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण…

ByByManvinder Mishra Feb 8, 2026

बिहार की बेटी अनु कुमारी: संघर्ष से विश्व विजेता बनने और 23.43 लाख का इनाम पाने की पूरी कहानी

बिहार की मिट्टी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर इरादे बुलंद हों, तो कोई…

ByByHarshvardhan Feb 7, 2026

मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना: ₹50,000 के लिए 15 फरवरी तक करें आवेदन, जानें स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

बिहार सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना (MKUY), राज्य की बेटियों के…

ByByPrachi Singh Feb 5, 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top