बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। रोहतास जिले के सासाराम में एक आधुनिक रेलवे जंक्शन के निर्माण को मंजूरी मिल गई है, जो न केवल रेल यातायात को सुगम बनाएगा, बल्कि राज्य की आर्थिक रीढ़ को भी मजबूती देगा। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 7 अरब रुपये (700 करोड़ रुपये) है। यह जंक्शन सासाराम के पास कर्मडीहरी गांव के पास बनाया जा रहा है, जो जिला मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

क्यों खास है सासाराम नॉर्थ जंक्शन?
सासाराम नॉर्थ जंक्शन कोई साधारण स्टेशन नहीं, बल्कि एक रणनीतिक रेल हब होगा। यह जंक्शन भारत की तीन सबसे महत्वपूर्ण रेल लाइनों को आपस में जोड़ेगा:
- सोननगर-जपला लाइन
- गया-हावड़ा लाइन
- पंडित दीन दयाल उपाध्याय (DDU)-दिल्ली मेन लाइन
इन तीन प्रमुख रूटों के मिलन से ट्रेनों के परिचालन में जबरदस्त लचीलापन आएगा। वर्तमान में दानापुर-मुगलसराय रेलखंड पर ट्रैफिक का भारी दबाव रहता है, जिससे ट्रेनों की लेटलतीफी एक आम समस्या है। इस नए जंक्शन और फ्लाईओवर के बन जाने से रूट डायवर्जन आसान हो जाएगा और मुख्य लाइन पर भीड़ कम होगी।
₹7 अरब का निवेश: क्या-क्या सुविधाएं बनेंगी?
रेलवे ने इस प्रोजेक्ट के लिए भारी बजट आवंटित किया है ताकि इसे भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जा सके। इस प्रोजेक्ट के मुख्य आकर्षण निम्नलिखित हैं:
- दो आधुनिक प्लेटफॉर्म: यहाँ 700-700 मीटर लंबे दो आधुनिक प्लेटफॉर्म बनाए जाएंगे, जिन पर शेड और फुटओवर ब्रिज की सुविधा होगी।
- रेल फ्लाईओवर (RFO): रेल यातायात को बिना रुकावट चलाने के लिए विशेष फ्लाईओवर और ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं। इनका काम लगभग अंतिम चरण में है।
- रोड ओवर रेल (ROR) ब्रिज: सड़क यातायात और रेल के बीच सामंजस्य बिठाने के लिए ROR ब्रिज का निर्माण हो रहा है, जिसके लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
- सपोर्टिंग स्टेशन: सासाराम स्टेशन के नॉर्थ केबिन के पास एक सहायक स्टेशन भी विकसित किया जा रहा है ताकि मुख्य स्टेशन का भार कम किया जा सके।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) और चौसा पावर प्लांट को लाभ
इस प्रोजेक्ट का एक सबसे बड़ा तकनीकी फायदा ‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ (DFCCIL) के साथ इसका जुड़ाव है। यह जंक्शन सीधे मालगाड़ियों के लिए बने विशेष ट्रैक से जुड़ेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा बक्सर के चौसा थर्मल पावर प्लांट को होगा। अब झारखंड के धनबाद क्षेत्र से कोयले की सप्लाई सीधे इस जंक्शन के माध्यम से हो सकेगी, जिससे कोयला ढुलाई सस्ती और तेज होगी।
बिहार का $7 बिलियन वाला बड़ा फ्रेमवर्क
हालाँकि सासाराम नॉर्थ जंक्शन की स्थानीय लागत 7 अरब रुपये (₹700 करोड़) है, लेकिन यह बिहार के लिए केंद्र सरकार के उस बड़े विजन का हिस्सा है जिसमें अरबों डॉलर का निवेश शामिल है। केंद्र ने बिहार के लिए ₹60,000 करोड़ ($7.2 बिलियन) की PM-SETU योजना और रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए ग्रीन बॉन्ड के माध्यम से भारी फंड जारी किया है। इसके अलावा, पटना-आरा-सासाराम के बीच ₹3,712 करोड़ की लागत से बनने वाला 4-लेन कॉरिडोर भी इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी को चार चांद लगा देगा।
स्थानीय युवाओं और व्यापार के लिए वरदान
इस जंक्शन के बनने से केवल ट्रेनें ही नहीं दौड़ेंगी, बल्कि रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे। रेलवे कनेक्टिविटी बेहतर होने से सासाराम और आसपास के इलाकों में लॉजिस्टिक्स कंपनियां, गोदाम (Warehouses) और छोटे उद्योगों की बाढ़ आने की उम्मीद है। साथ ही, सासाराम एक ऐतिहासिक शहर है, बेहतर रेल सुविधाओं से यहाँ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
सासाराम नॉर्थ जंक्शन का पुनरुद्धार और निर्माण बिहार के ‘विकास पथ’ पर एक मील का पत्थर है। 10 साल से लटका यह प्रोजेक्ट अब युद्ध स्तर पर पूरा किया जा रहा है और अगले 3 वर्षों के भीतर इसके चालू होने की उम्मीद है। यह प्रोजेक्ट साबित करता है कि बिहार अब केवल ‘लेबर सप्लाई’ का केंद्र नहीं, बल्कि भारत का नया ‘लॉजिस्टिक्स हब’ बनने की दिशा में अग्रसर है।














