21वीं सदी में एक मध्यकालीन प्रथा आज जहाँ हम डिजिटल इंडिया और आधुनिकता की बातें करते हैं, वहीं बिहार के कुछ इलाकों से ‘पकड़ुआ विवाह’ जैसी खबरें रोंगटे खड़े कर देती हैं। हाल ही में फरवरी 2026 में समस्तीपुर जिले के शाहपुर पटोरी क्षेत्र से एक ऐसी ही घटना सामने आई, जिसने कानून-व्यवस्था और सामाजिक नैतिकता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यह कहानी है 22 साल के एक छात्र नीतीश कुमार की, जो पुलिस बनने का सपना देख रहा था, लेकिन उसे जबरन दूल्हा बना दिया गया।

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क्या है पूरी घटना? (समस्तीपुर का नीतीश कुमार केस)
समस्तीपुर के जोडी पोखर गांव का रहने वाला नीतीश कुमार प्रतियोगी परीक्षाओं (बिहार पुलिस भर्ती) की तैयारी कर रहा था। 7 फरवरी, 2026 की शाम को जब वह लाइब्रेरी से पढ़ाई करके लौट रहा था, तब रास्ते में कुछ लोगों ने उसे रोका। नीतीश का आरोप है कि उसे कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया गया, जिससे वह बेहोश हो गया।
इसके बाद उसे अगवा कर करीब 4 किलोमीटर दूर मोरवा गांव के एक मंदिर में ले जाया गया। वहाँ नशे की हालत में ही उसकी शादी लक्ष्मी कुमारी (शंकर राय की बेटी) से करा दी गई। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि नीतीश पूरी तरह होश में नहीं है, उसकी आँखें बंद हैं और वह ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा है, जबकि महिलाएं मंगल गीत गा रही हैं और जबरन वरमाला की रस्म पूरी कराई जा रही है।
कैद में बनाया वीडियो और पुलिस की कार्रवाई
शादी के बाद नीतीश को एक कमरे में 24 घंटे से ज्यादा समय तक बंधक बनाकर रखा गया। इसी दौरान उसने हिम्मत दिखाई और अपने मोबाइल से एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें वह रोते हुए अपनी जान बचाने की गुहार लगा रहा था। जब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब पुलिस हरकत में आई।
नीतीश के परिजनों की शिकायत पर शाहपुर पटोरी थाने की पुलिस ने 10 फरवरी, 2026 को उसे सकुशल छुड़ाया। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि 14 फरवरी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि वे पीड़ित का बयान दर्ज करने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे, जबकि लड़की पक्ष इसे ‘अरेंज मैरिज’ बता रहा है।
सीतामढ़ी का दूसरा पहलू: स्वैच्छिक विवाह बनाम जबरदस्ती
इसी दौरान सीतामढ़ी से भी एक वीडियो वायरल हुआ, जहाँ बीपीएससी (BPSC) शिक्षिका वंदना कुमारी ने अपने प्रेमी संजीत कुमार के साथ शादी कर ली। हालाँकि शुरुआत में इसे भी अपहरण से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन वंदना ने वीडियो जारी कर साफ किया कि उन्होंने अपनी मर्जी से शादी की है। यह घटना दर्शाती है कि समाज में हर शादी ‘पकड़ुआ’ नहीं होती, लेकिन जबरन शादियों के डर से प्रेम विवाहों को भी अक्सर इसी चश्मे से देखा जाने लगता है।
पकड़ुआ विवाह और कानून: क्या कहता है कोर्ट?
पकड़ुआ विवाह पूरी तरह से गैर-कानूनी है।
- पटना हाई कोर्ट का फैसला: नवंबर 2023 में पटना हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा था कि यदि शादी में ‘सप्तपदी’ (सात फेरे) जबरदस्ती या बंदूक की नोक पर कराए गए हैं, तो वह शादी कानूनी रूप से मान्य नहीं है।
- BNS की धाराएं: नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत किसी को अगवा करना (Section 137) और जबरन शादी के लिए मजबूर करना गंभीर अपराध है, जिसमें 10 साल तक की सजा का प्रावधान है।
- दहेज प्रथा का प्रभाव: रिपोर्टों के अनुसार, बिहार में सरकारी नौकरी या अच्छी शिक्षा वाले लड़कों की ‘डिमांड’ ज्यादा होती है। जब लड़की पक्ष दहेज देने में असमर्थ होता है, तो वे कभी-कभी ऐसे गलत रास्तों का सहारा लेते हैं।
पकड़ुआ विवाह न केवल लड़के के मानवाधिकारों का हनन है, बल्कि यह उस लड़की के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है जिसे जबरदस्ती किसी के साथ बांध दिया जाता है। नीतीश कुमार जैसे युवाओं के साथ हुई यह घटना बताती है कि अभी भी हमें जमीनी स्तर पर बहुत सुधार की जरूरत है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे मामलों में ‘समझौते’ के बजाय कड़ी कानूनी कार्रवाई करे ताकि भविष्य में किसी और छात्र का सपना इस तरह न टूटे।















