भारतीय राजनीति में नेताओं की भाषा अक्सर चर्चा का विषय बनती है, लेकिन जब बात महिलाओं के सम्मान और किसी राज्य की अस्मिता पर चोट करने वाली हो, तो वह केवल राजनीति नहीं रह जाती। जनवरी 2026 की शुरुआत में उत्तराखंड से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसने देवभूमि से लेकर बिहार की गलियों तक आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे बिहार की महिलाओं को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?
यह घटना अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र के दोलाघाट की बताई जा रही है। वायरल वीडियो में गिरधारी लाल साहू कुछ अविवाहित युवकों से बात कर रहे हैं। बातचीत के दौरान वे कहते हैं, “लड़की बिहार से ले आएंगे! बिहार में ₹20-25 हजार में ही मिल जाती है!” । वे युवकों को सलाह देते हुए कहते हैं कि अगर यहाँ शादी नहीं हो रही है, तो उनके साथ चलें, वे बिहार से उनके लिए लड़कियाँ दिला देंगे।
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर फैला, इसने एक बड़े विवाद का रूप ले लिया। बिहार की बेटियों की “कीमत” लगाने वाले इस बयान ने न केवल महिलाओं का अपमान किया, बल्कि मानव तस्करी जैसी गंभीर कुप्रथाओं को भी हवा दी।
राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया
इस बयान के सामने आते ही विपक्षी दलों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को आड़े हाथों लिया है।
- आरजेडी (RJD) का हमला: राष्ट्रीय जनता दल ने इस वीडियो को साझा करते हुए इसे भाजपा और संघ की “घृणित सोच” करार दिया । पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से इस पर स्पष्टीकरण की मांग की है। आरजेडी ने ट्वीट किया कि उत्तराखंड सरकार की मंत्री के “बेशर्म पति” ने बिहार की महिलाओं के प्रति भाजपा के असली नजरिए को उजागर कर दिया है ।
- कांग्रेस की नाराजगी: कांग्रेस ने इस बयान को महिलाओं का वस्तुकरण और अपमान बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह मानसिकता दिखाती है कि भाजपा नेताओं के मन में बेटियों के लिए कोई सम्मान नहीं है।
- बीजेपी और जेडीयू का रुख: दिलचस्प बात यह है कि बिहार बीजेपी के प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने भी इस बयान की निंदा की और इसे “बीमार मानसिकता” का परिचायक बताया। उन्होंने साहू के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है । वहीं, जेडीयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने भी इस भाषा को पूरी तरह अस्वीकार्य और निंदनीय बताया है ।
महिला आयोग का कड़ा रुख
बिहार राज्य महिला आयोग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने साहू के बयान को “बौद्धिक दिवालियापन” बताते हुए कहा कि किसी भी सभ्य समाज में ऐसी भाषा की जगह नहीं है । आयोग ने गिरधारी लाल साहू को नोटिस जारी कर सार्वजनिक माफी की मांग की है ।
गिरधारी लाल साहू की सफाई
विवाद बढ़ता देख गिरधारी लाल साहू ने एक वीडियो जारी कर माफी मांगी और अपनी सफाई पेश की । उन्होंने दावा किया कि उनके बयान को “तोड़-मरोड़कर” पेश किया गया है। साहू के अनुसार, वे एक दोस्त की शादी का किस्सा सुना रहे थे और उनका इरादा किसी का अपमान करना नहीं था। उन्होंने खुद को महिलाओं का सम्मान करने वाला बताते हुए कहा कि वे हर साल बरेली में 101 बेटियों की शादी करवाते हैं । हालांकि, वायरल वीडियो की स्पष्टता उनके इन दावों पर सवाल खड़े करती है।
कौन हैं गिरधारी लाल साहू?
यह पहली बार नहीं है जब गिरधारी लाल साहू विवादों में घिरे हैं। उनकी पहचान केवल एक मंत्री के पति के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में है जिसका आपराधिक इतिहास दशकों पुराना है ।
- आपराधिक मामले: पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, साहू के खिलाफ 1981 से लेकर 2007 के बीच कई मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें मारपीट, गाली-गलौज से लेकर हत्या के प्रयास और हत्या जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं ।
- किडनी चोरी का आरोप: 2015 में उनके एक पूर्व नौकर ने आरोप लगाया था कि साहू उसे श्रीलंका ले गए और वहां उसकी किडनी निकालकर अपनी पत्नी (तत्कालीन) में ट्रांसप्लांट करवा दी ।
गिरधारी लाल साहू विवादित बयान
बिहार की महिलाओं की गरिमा को ₹20-25 हजार की कीमत से तौलना केवल एक व्यक्ति की “फिसली हुई जुबान” का मामला नहीं है। यह समाज की उस गहरी पितृसत्तात्मक सोच को दर्शाता है जहाँ महिलाओं को आज भी एक वस्तु समझा जाता है। उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण मंत्री रेखा आर्या के घर से ऐसी सोच का निकलना और भी दुखद है। अब देखना यह होगा कि क्या भाजपा नेतृत्व इस पर कोई ठोस कार्रवाई करता है या इसे महज एक चुनावी मुद्दा बनाकर छोड़ दिया जाएगा।


















