जब भी हम बिहार की बात करते हैं, तो अक्सर हमारे दिमाग में खेती-किसानी और राजनीति की तस्वीर आती है। लेकिन 2025 का बिहार बदल रहा है। आज बिहार के उद्यमी न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में अपने बिजनेस का लोहा मनवा रहे हैं। पटना की तंग गलियों से निकलकर लंदन के आलीशान बोर्डरूम्स तक का सफर तय करने वाले ये लोग आज करोड़ों-अरबों के साम्राज्य के मालिक हैं। आइए जानते हैं बिहार के सबसे अमीर लोग 2026 दिग्गज चेहरों के बारे में जिन्होंने दौलत और शोहरत के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

1. अनिल अग्रवाल: पटना के लाल और दुनिया के ‘मेटल किंग’
बिहार के सबसे अमीर व्यक्तियों की लिस्ट में पहला नाम हमेशा अनिल अग्रवाल का आता है। वेदांता रिसोर्सेज (Vedanta Resources) के संस्थापक और चेयरमैन अनिल अग्रवाल का जन्म पटना के एक साधारण परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई पटना के मिलर हाई स्कूल से की और पैसे की कमी के कारण कॉलेज नहीं जा सके ।
मात्र 19 साल की उम्र में वे केवल एक टिफिन बॉक्स और बिस्तर लेकर मुंबई चले गए थे । कबाड़ के कारोबार (Scrap Metal) से शुरुआत करने वाले अग्रवाल ने आज एक वैश्विक खनन साम्राज्य खड़ा कर दिया है। 2025 की हुरुन इंडिया रिच लिस्ट (Hurun India Rich List) के अनुसार, अनिल अग्रवाल और उनके परिवार की कुल संपत्ति लगभग ₹1,11,400 करोड़ आंकी गई है । हाल ही में उन्होंने अपने बेटे अग्निवेश के निधन के बाद अपनी 75% संपत्ति समाज सेवा के लिए दान करने का संकल्प दोहराया है ।
2. रविंद्र किशोर (आरके) सिन्हा: सिक्योरिटी सेक्टर के बेताज बादशाह
पटना के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति रविंद्र किशोर सिन्हा (RK Sinha) हैं। उन्होंने 1974 में पटना के एक छोटे से गैरेज से सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) की शुरुआत की थी । एक पूर्व पत्रकार के रूप में उन्होंने युद्ध के दौरान पूर्व सैनिकों की समस्याओं को देखा और उन्हें रोजगार देने के लिए यह कंपनी बनाई।
आज SIS भारत की सबसे बड़ी निजी सुरक्षा प्रदाता कंपनी है और ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और न्यूजीलैंड जैसे देशों में भी इसका बड़ा कारोबार है । 2025 की रिपोर्ट्स के अनुसार, आरके सिन्हा की कुल संपत्ति लगभग ₹8,400 करोड़ (1बिलियन डॉलर) है । उनकी कंपनी बिहार की पहली ऐसी कंपनी है जो ‘बिलियन डॉलर’ का टर्नओवर पार कर चुकी है ।
3. फार्मा इंडस्ट्री के दिग्गज: अलकेम और अरिस्टो
बिहार के जहानाबाद जिले ने देश को दो बड़े फार्मा टाइकून दिए हैं—संप्रदा सिंह और महेंद्र प्रसाद।
- संप्रदा सिंह (Alkem Labs): इन्होंने 1973 में अलकेम लैबोरेट्रीज की स्थापना की थी। आज यह भारत की टॉप फार्मा कंपनियों में से एक है। संप्रदा सिंह के निधन के बाद उनका परिवार इस साम्राज्य को संभाल रहा है, जिसकी कुल संपत्ति ₹25,000 करोड़ से अधिक है ।
- महेंद्र प्रसाद (Aristo Pharma): ‘किंग महेंद्र’ के नाम से मशहूर सात बार के राज्यसभा सांसद महेंद्र प्रसाद ने अरिस्टो फार्मास्युटिकल्स की नींव रखी थी। 2021 में उनके निधन के बाद उनके ₹40,000 करोड़ के साम्राज्य को लेकर कानूनी विवाद भी चल रहा है ।
4. राजनीति के ‘करोड़पति’ चेहरे (2025 चुनाव)
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के हलफनामों ने राजनीति में बढ़ती संपत्ति को उजागर किया है।
- रण कौशल प्रताप सिंह (गूड्डू सिंह): वीआईपी (VIP) पार्टी के टिकट पर लोरिया सीट से लड़ने वाले गूड्डू सिंह 2025 के सबसे अमीर उम्मीदवार बनकर उभरे, जिनकी घोषित संपत्ति ₹373 करोड़ से अधिक है ।
- नीतिश कुमार (RLJP): गया की गुरुआ सीट से चुनाव लड़ने वाले इस उम्मीदवार ने लगभग ₹250 करोड़ की संपत्ति घोषित की है ।
- कुमार प्रणय (BJP): मुंगेर से भाजपा विधायक कुमार प्रणय की संपत्ति लगभग ₹171 करोड़ है ।
5. नए जमाने के उभरते सितारे: मखाना और इथेनॉल किंग
बिहार का भविष्य अब खेती के आधुनिक स्वरूप में दिख रहा है।
- सत्यजीत सिंह (Shakti Sudha): इन्हें बिहार का ‘मखाना मैन’ कहा जाता है। इन्होंने मखाना को एक वैश्विक सुपरफूड बना दिया है। उनकी कंपनी शक्ति सुधा 12,000 से अधिक किसानों के साथ जुड़ी है और इसका लक्ष्य ₹1,000 करोड़ का टर्नओवर हासिल करना है ।
- शुभम सिंह (Bharat Oorja): मात्र 26 साल की उम्र में शुभम सिंह ने इथेनॉल प्लांट के जरिए ₹500 करोड़ से अधिक की नेटवर्थ बना ली है ।
6. रियल एस्टेट और डिजिटल शिक्षा
- बसंत बंसल (M3M India): गुरुग्राम की रियल एस्टेट कंपनी M3M के संस्थापक बसंत बंसल की जड़ें भी बिहार से जुड़ी हैं। उनकी कुल संपत्ति ₹41,140 करोड़ के करीब है ।
- खान सर (Khan GS Research Centre): पटना के मशहूर शिक्षक खान सर डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा नाम बन चुके हैं। उनके यूट्यूब चैनल पर 25 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं, जो उनकी व्यापक पहुंच और प्रभाव को दर्शाते हैं ।
बिहार के इन अमीरों की सूची यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो संसाधन खुद-ब-खुद जुट जाते हैं। चाहे वह वेदांता के अनिल अग्रवाल हों या मखाना किंग सत्यजीत सिंह, इन सभी ने बिहार की पहचान को गरीबी से बदलकर ‘उद्यमिता’ (Entrepreneurship) की ओर मोड़ दिया है।

















