बिहार की शिक्षा व्यवस्था में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहाँ एक तरफ राज्य के बड़े शहरों में हाईटेक परीक्षा केंद्र बन रहे हैं, वहीं सीतामढ़ी के विधायक सुनील कुमार पिंटू ने भी जिले के छात्रों के लिए एक बड़ी मांग सरकार के सामने रखी है। उन्होंने मांग की है कि सीतामढ़ी में भी पटना के ‘बापू परीक्षा परिसर’ की तर्ज पर एक ‘आदर्श परीक्षा केंद्र’ (Model Examination Center) खोला जाए.
यह मांग सिर्फ एक इमारत बनाने की नहीं है, बल्कि यह सीतामढ़ी के हजारों छात्र-छात्राओं के भविष्य और उनकी सुरक्षा से जुड़ी है।

आखिर क्या है यह ‘आदर्श परीक्षा केंद्र’?
आदर्श परीक्षा केंद्र का मतलब एक ऐसी जगह से है जहाँ परीक्षा देने का अनुभव पूरी तरह बदल जाता है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने राज्य के 9 प्रमंडलों में ऐसे 10 से 12 केंद्र विकसित किए हैं.
इन केंद्रों की सबसे बड़ी खासियत इनकी तकनीक है:
- AI कैमरों से निगरानी: यहाँ ऐसे सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं जिनमें कोई ‘ब्लाइंड स्पॉट’ नहीं होता। ये कैमरे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस होते हैं, जो किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ लेते हैं.
- बायोमेट्रिक हाजिरी: छात्रों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए अंगूठे के निशान और चेहरा पहचानने वाली तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे फर्जीवाड़ा रुकता है.
- हाइब्रिड मोड: इन सेंटर्स पर कागज-पेन वाली परीक्षा के साथ-साथ कंप्यूटर आधारित (Online) टेस्ट भी आसानी से लिए जा सकते हैं.
- दिव्यांग अनुकूल: यहाँ रैंप, लिफ्ट और दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष सुविधाएं मौजूद होती हैं.
सीतामढ़ी को इसकी जरूरत क्यों है?
विधायक सुनील कुमार पिंटू ने यह मांग यूँ ही नहीं उठाई है। इसके पीछे जिले की वर्तमान स्थिति एक बड़ी वजह है।
1. सुरक्षा और अव्यवस्था का डर
सीतामढ़ी के कई स्कूलों में परीक्षा के दौरान भारी भीड़ हो जाती है। पिछले दिनों सीतामढ़ी उच्च विद्यालय जैसे केंद्रों पर भगदड़ और धक्का-मुक्की की खबरें आई थीं, जिसमें कई छात्र घायल हो गए थे. एक व्यवस्थित आदर्श केंद्र ऐसी घटनाओं को रोकने में मददगार होगा।
2. ट्रैफिक जाम की बड़ी समस्या
परीक्षा के दिनों में सीतामढ़ी शहर का हाल बेहाल हो जाता है। मेहसौल चौक, स्टेशन रोड और डुमरा रोड पर घंटों लंबा जाम लगा रहता है. परीक्षार्थी अक्सर समय पर केंद्र नहीं पहुँच पाते। विधायक का मानना है कि शहर के बाहर एक बड़ा सेंटर होने से ट्रैफिक का दबाव कम होगा.
3. बुनियादी सुविधाओं की कमी
सीतामढ़ी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (SIT) में एक छात्रा की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया था कि जिले के शैक्षणिक संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं, जैसे शुद्ध पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं की कितनी कमी है. आदर्श परीक्षा केंद्र में छात्रों के लिए वेटिंग एरिया, शुद्ध पानी और एयर-कंडीशन हॉल जैसी सुविधाएं होती हैं.
सुनील कुमार पिंटू का विजन
विधायक सुनील कुमार पिंटू, जो 2025 के चुनावों में फिर से निर्वाचित हुए हैं, सीतामढ़ी को ‘माता जानकी की जन्मभूमि’ के रूप में विश्व स्तर पर पहचान दिलाना चाहते हैं . उनका कहना है कि जैसे सीतामढ़ी को अयोध्या की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है, वैसे ही यहाँ की शिक्षा व्यवस्था भी आधुनिक होनी चाहिए.
उन्होंने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि बाईपास रोड या कलेक्ट्रेट के पास इस केंद्र के लिए जमीन चिन्हित की जाए. यह केंद्र न केवल बोर्ड परीक्षाओं के लिए बल्कि BPSC, UPSC और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी एक सुरक्षित ठिकाना बनेगा.
स्थानीय छात्रों और अर्थव्यवस्था को फायदा
अगर सीतामढ़ी में यह केंद्र बनता है, तो इसके कई फायदे होंगे:
- छात्रों को राहत: जिले के छात्रों को ऑनलाइन परीक्षा देने के लिए मुजफ्फरपुर या पटना नहीं जाना पड़ेगा।
- पारदर्शिता: तकनीक की वजह से कदाचार और पेपर लीक जैसी समस्याओं पर लगाम लगेगी.
- रोजगार के अवसर: केंद्र के रखरखाव के लिए तकनीकी स्टाफ, सुरक्षा गार्ड और डेटा ऑपरेटरों की जरूरत होगी, जिससे स्थानीय लोगों को काम मिलेगा.
सीतामढ़ी में आदर्श परीक्षा केंद्र की मांग समय की जरूरत है। विधायक सुनील कुमार पिंटू की यह पहल अगर धरातल पर उतरती है, तो यह सीतामढ़ी के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी। अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह सीतामढ़ी के मेधावी छात्रों को यह हाईटेक सौगात कब तक देती है।























